
पशु-पक्षी कथा
सीहो मूसगो य
शेर और चूहा
छोटा चूहा जाल काटकर शेर को बचाता है।
एक वन में एक शेर था। एक बार वह पेड़ की छाया में सोया।
तब एक छोटा चूहा वहाँ आया। वह शेर के शरीर पर इधर-उधर दौड़ा।
शेर उठा। वह क्रोधित हुआ। उसने चूहे को पंजे से पकड़ लिया।
चूहा डर गया। उसने कहा — “हे वनराज, मुझे छोड़ दो। मैं कभी तुम्हारा उपकार करूँगा।”
शेर हँसा। उसने सोचा — “छोटा चूहा मेरा क्या करेगा?” तब उसने चूहे को छोड़ दिया।
एक बार एक शिकारी ने वन में जाल फैलाया। शेर जाल में गिर गया।
शेर बहुत गरजा। किन्तु वह छूट नहीं सका।
चूहे ने शेर की आवाज़ सुनी। वह जल्दी आया। उसने दाँतों से जाल काट दिया।
शेर मुक्त हुआ। उसने कहा — “मित्र, तुमने मेरे प्राण बचाए।” तब वे दोनों मित्र बन गए।
सीख
लहुओ वि कयाइ महंतस्स उवयारं करइ।
छोटा भी कभी बड़े का उपकार करता है।
कथा के शब्द
- वणम्मिवन में
- सीहोशेर, सिंह
- सुवीअसोया
- मूसगोचूहा
- धावीअदौड़ा
- कुद्धोक्रोधित
- भीओडरा हुआ
- मुंचहि(तुम) छोड़ो
- करिहिमि(मैं) करूँगा
- वाहोशिकारी
- जालंजाल
- गज्जीअगरजा
- छिंदीअकाटा
- मुक्कोछूटा हुआ, मुक्त
समझ जाँचिए
1. शेर जाल में कैसे फँसा?
2. चूहे ने जाल किससे काटा?
3. चूहे की बात सुनकर शेर ने क्या किया?